जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। डीआरडीओ ने भारतीय नौसेना के लिए पहली एंटी शिप हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल बना रहा है। दुनिया इसकी पहली झलक गणतंत्र दिवस परेड के दौरान कर्तव्य पथ पर देख सकेगी। यह समुद्र में दुश्मनों के लिए तबाही होगी। यह 1500 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम है। वहीं इसकी गति 1200 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा बताई जा रही है।
समंदर में तैनात होगी मिसाइल
पुराने जमाने में एक कहावत है कि जिसने समंदर को जीत लिया उसने जग जीत लिया। ईरान जंग ने इस पुरानी कहावत को चरितार्थ कर दिया। गलोबल एनर्जी सप्लाई के लिए गर्दन की नस कहे जाने वाले होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी कर उसने पूरी दुनिया में खलबली मचा दी। अब भारत भी अपनी समुद्री ताकत में बड़ा इजाफा करने जा रहा है। अब ऐसी हाइपरसोनिक मिसाइल डेवलप कर ली है जो अरब सागर से लेकर हिन्द महासागर तक में गेमचेंजर साबित होने वाली है। इसे एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रमादित्य और आईएनएस विक्रांत पर तैनात किया जाएगा। यह मिसाइल भारत की सुरक्षा रणनीति में कई गुना वृद्धि करेगी। साथ ही भविष्य के किसी भी समुद्री संघर्ष में भारतीय सशस्त्र बलों को निर्णायक बढ़त दिलाने में सक्षम होगी। इस मिसाइल का नाम एलआरएएसएचएम् रखा गया है। लॉन्ग रेंज एंटी शिप हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल है। डीआरडीओ द्वारा विकसित लंबी दूरी की एंटी-शिप हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल की झलक पहली बार दुनिया 77वें गणतंत्र दिवस परेड में देखेगी। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन ने इसे भारतीय नौ सेना के लिए खास तौर पर विकसित किया है। लंबी दूरी की यह मिसाइल रक्षा क्षेत्र में भारत की बढ़ती क्षमता, समुद्री ताकत और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में तेजी से बढ़ती आत्मनिर्भरता का जीता-जागता प्रमाण है। डीआरडीओ जो एंटी-शिप हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल विकसित कर रही है, वह समुद्र में दुश्मनों पर तबाही बनकर गिरने में सक्षम है।
गति, लंबी दूरी तक सटीक निशाना
रिपोर्ट के अनुसार यह मिसाइल अपनी अत्यधिक गति, लंबी दूरी तक सटीक निशाना साधने की क्षमता और जटिल फ्लाइट-पाथ यानी (उड़ान पथ के कारण दुनिया की सबसे एडवांस एंटी-शिप सिसटम्स में शामिल होगी। मिसाइल लॉन्च के समय लगभग मैक 10 की गति प्राप्त करती है। लक्ष्य के करीब पहुंचते-पहुंचते भी मैक 5 से मैक 6 की रफ्तार बनाए रखती है। करीब 1,500 किलोमीटर की मारक क्षमता वाली यह मिसाइल दुश्मन के युद्धपोतों को उनकी पारंपरिक जवाबी कार्रवाई की सीमा से कहीं बाहर रहते हुए निशाना बना सकती है। लंबी दूरी की मिसाइल को उड़ान मार्ग के दौरान रोक पाना बेहद मुश्किल है। यह भारत की सामरिक हमलावर क्षमता को कई गुना बढ़ा देगी।
मिसाइल से लैस युद्धपोत
इस मिसाइल से लैस युद्धपोत और पनडुब्बियां सुरक्षित दूरी पर रहते हुए दुश्मन के जहाजी बेड़ों को निशाना बना सकेगी। इससे भारतीय बलों को जवाबी हमले के खतरे को कम करते हुए अधिक लचीली सैन्य रणनीति अपनाने का अवसर मिलेगा। इस मिसाइल में टू-फेज सॉलिड रॉकेट मोटर के साथ हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल का उपयोग किया गया है। डीआरडीओ के अनुसार उड़ान के दौरान ग्लाइड व्हीकल अलग होकर बिना इंजन के लक्ष्य की ओर बढ़ता है। स्वदेशी हाई-प्रीसिजन सेंसर्स की मदद से यह मिसाइल अंतिम चरण में सटीक प्रहार करती है। यह मिसाइल भारत के स्वदेशी सटीक हथियारों के बढ़ते भंडार का हिस्सा होगी। डीआरडीओ इसकी क्षमता को 3,000 किलोमीटर से 3,500 किलोमीटर रेंज तक बढ़ाने की योजना पर काम कर रहा है। डीआरडीओ का एडवांस्ड लैब टेक्नोलॉजी इस हाइपरसोनिक ग्लाइड टेक्नोलॉजी पर काम कर रहा है।





