यूपी में मिला डायनासोर का अंडा, सहारनपुर में था डायनासोर का जमावड़ा

जनप्रवाद ब्यूरो, टीम । यूपी के सहारनपुर के वॉटर पीस इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं ने बड़ा दावा किया है। उनके अनुसार सहंसरा वैली में डायनासोर के अंडे और दुर्लभ जीवाश्म मिले हैं। यह खोज भारत के भूवैज्ञानिक इतिहास के लिए बड़ा मोड़ साबित हो सकती है।



साउथ अमेरिका में डायनासोर का फॉसिल वाला अंडा मिलने के बाद अब यही खोज यूपी के सहारनपुर में हुई है। इसने भारत के साथ पूरे एशिया में डायनासोर की जिंदगी के बारे में समझ बेहतर होने की वैज्ञानिकों की उम्मीदों को बढ़ा दिया है। साइंटिस्ट इसे बड़ी खोज बता रहे हैं। यह करोड़ों साल पुराने उस रहस्य से पर्दा उठा सकती है, जिससे आज तक दुनिया अनजान थी। सहारनपुर के वॉटर पीस इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि उन्हें सहंसरा वैली में डायनासोर के अंडे और दुर्लभ जीवाश्म मिले हैं। बता दें कि सहारनपुर की सहंसरा वैली जो आज एक शांत घाटी दिखती है, वह कभी डायनासोरों का बसेरा हुआ करती थी। वॉटर पीस इंस्टीट्यूट के शोधार्थी कमल देव और नोहा सैफ ने यहां की चट्टानी परतों में छिपे डायनासोर के अंडे खोज निकाले हैं। इन अंडों की पहचान के लिए जब वीक एसिड टेस्ट किया गया, तो इनमें भारी मात्रा में कैल्शियम कार्बोनेट की मौजूदगी पाई गई। इस खोज की सबसे महत्वपूर्ण बात इसकी भौगोलिक स्थिति है। शोधकर्ताओं के अनुसार, सहंसरा वैली और शिवालिक का यह हिस्सा कभी अरावली रेंज का अंतिम छोर हुआ करता था। इसके प्रमाण के रूप में यहां ग्लूकोनाइट यानी हरे रंग की मिट्टी की परतें मिली हैं। जो इस बात की गवाह हैं कि यह क्षेत्र कभी तटीय इलाका था। खोज से यह भी पता चला कि करोड़ों साल पहले यह क्षेत्र एशिया में सबसे अहम था। यहां कई पुरानी सभ्यताओं का विकास और अंत हुआ।

शोधकर्ताओं के अनुसार ये जीव करीब 7 लाख करोड़ साल पहले यहां मौजूद थे। हिमालय बनने की प्रक्रिया के दौरान ये मेसोजोइक परतें ऊपर आ गईं। जिससे आज ये अवशेष सतह पर दिखाई दे रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि यहां प्रजातियों की भारी विविधता मिली है। शोध में डायनासोर की ऐसी प्रजाति के भी संकेत मिले हैं, जो एक बार में दो अंडे देती थी। यह खोज साबित करती है कि शिवालिक की ये पहाड़ियां डायनासोरों की एक बड़ी और विविध बस्ती थी। इस रिसर्च से पता चल सकता है कि एशिया महाद्वीप में डायनासोर कैसे पले-बढ़े थे।

वॉटर पीस इंस्टीट्यूट के शोधकर्ता कमल देव के अनुसार वे पिछले 2 साल से सहंसरा वैली में डायनासोर को लेकर खोज कर रहे हैं। हमारी खोज यह स्पष्ट करती है कि यह क्षेत्र अरावली का समुद्री किनारा था। इन अंडों का बाहरी ढांचा मूल हड्डी जैसा है, लेकिन अंदर से ये कैल्शियम कार्बोनेट के ठोस रेप्लिका बन चुके हैं। ये खनिजों के जमाव के कारण हुआ है। सहारनपुर की यह सहंसरा वैली अब वैज्ञानिकों और भूवैज्ञानिकों के लिए शोध का नया केंद्र बन गई है। वॉटर पीस इंस्टीट्यूट की यह खोज आने वाले समय में पृथ्वी के इतिहास की नई किताब लिखेगी। खोज में डायनासोर के लगभग शरीर के सभी पार्ट्स मिल चुके हैं, जिनके ऊपर शोध जारी है।