आईएनएस अंजदीप कल होगा लांच, ढूंढ-ढूंढकर मारेगा दुश्मन की पनडुब्बी

जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली। भारतीय नौसेना को एक और पनडुब्बी रोधी युद्धपोत अंजदीप मिलने जा रहा है। उथले पानी में काम करने की क्षमता वाला आईएनएस अंजदीप 27 को लांच होगा। यह सतह के साथ समुद्र की गहराई में दुश्मन की पनडुब्बी ट्रैक कर नष्ट करने में सक्षम है।
भारतीय नौसेना होगी आत्मनिर्भर

2047 तक भारतीय नौसेना पूरी तरह आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। एक के बाद एक नए स्वदेशी पोत नौसेना में शामिल किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में 27 फरवरी को स्वदेशी एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट आईएनएस अंजदीप भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल होगा। इसकी खासियत है कि यह सतह के साथ-साथ समुद्र की गहराई में भी दुश्मन की पनडुब्बी को ट्रैक कर नष्ट कर सकता है। नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी की मौजूदगी में चेन्नई पोर्ट पर इसे आधिकारिक तौर पर नौसेना का हिस्सा बनाया जाएगा। पहले तीन पनडुब्बी रोधी उथले जल युद्धपोत आईएनएस अर्णाला, आईएनएस अंद्रोत्त और आईएनएस माहे नौसेना में शामिल किए जा चुके हैं।
हमला और बचाव दोनों आपरेशन के लिए इस्तेमाल

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार आईएनएस अंजदीप को हमला और बचाव दोनों आपरेशन के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। यह पनडुब्बी रोधी रॉकेट लांचर, हल्के वजन वाले टॉरपीडो से लैस है। इसके अलावा 30 मिलीमीटर नेवल गन, एएसडब्ल्यू कॉम्बैट सूट, हल-माउंटेड सोनार और लो-फ्रीक्वेंसी वैरिएबल डेप्थ सोनार को भी लगाया गया है। यह 25 नॉटिकल मील प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकता है। एक बार में यह करीब 3,300 किलोमीटर तक की दूरी तय कर सकता है। यह तट से 100 से 150 नॉटिकल मील की दूरी तक दुश्मन की पनडुब्बी का पता लगा सकता है। 77 मीटर लंबा आईएनएस अंजदीप 30-40 मीटर की गहराई वाले क्षेत्रों में संचालित होने वाली किसी भी पनडुब्बी का पता लगाकर उसे नष्ट कर सकता है। यह युद्धपोत बड़े युद्धपोतों के लिए समुद्री मार्ग को सुरक्षित करने में भी अहम भूमिका निभाएगा।
80 फीसदी स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल

इस पोत का निर्माण गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड ने किया है। यह पूर्ण रूप से भारत में विकसित है। साथ ही 80 फीसदी स्वदेशी सामग्री का ही इस्तेमाल किया गया है। इसे भारतीय नौसेना की पनडुब्बी रोधी उथले जल युद्धपोत परियोजना के तहत तैयार किया गया है। जिसमें 16 पोत तैयार किए जाने हैं। यह इस श्रंखला का तीसरा पोत है। अंजदीप का नामकरण कर्नाटक के कारवार तट के समीप स्थित अंजदीप द्वीप के नाम पर किया गया है। यह नाम पहले की पेट्या श्रेणी के युद्धपोत आईएनएस अंजदीप की स्मृति को भी पुनर्जीवित करता है, जिसे वर्ष 2003 में सेवामुक्त कर दिया गया था। पाकिस्तान, चीन की मदद से अपनी सबमरीन फ्लीट की ताकत बढ़ा रहा है। पाकिस्तान ने चीन से कुल 8 हैंगर क्लास सबमरीन खरीदी हैं। इन सबमरीन से निपटने के लिए भारतीय नौसेना ने एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट परियोजना पर काम तेज कर दिया था।