एसीवी एच-562 को तटरक्षक बल में किया गया शामिल, 160 सैटेलाइट स्मार्ट एंटी-एयरफील्ड बम की होगी खरीद

जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। रक्षा क्षेत्र को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। एक ओर जहां नौसेना को मजबूत करने के लिए भारत में स्वदेशी रूप से निर्मित एसीवी एच-562 को तटरक्षक बल में शामिल किया गया। वहीं सरकार ने भारतीय वायु सेना के लिए 160 सैटेलाइट स्मार्ट एंटी-एयरफील्ड हथियार खरीदने के लिए बीडीएल के साथ 811 करोड़ रुपये का करार किया है। भारतीय तटरक्षक बल ने समुद्री सुरक्षा को मजबूत करते हुए एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। तटरक्षक बल ने स्वदेश में निर्मित समुद्री पोत को अपने बेड़े में शामिल किया है। यह एयर कुशन व्हीकल एसीवी एच-562 है। यह भारत में स्वदेशी रूप से निर्मित दूसरा एयर कुशन व्हीकल है। एयर कुशन व्हीकल के शामिल होने से तटरक्षक बल की समुद्री तैयारियों को और मजबूती मिलेगी। यह पोत तटरक्षक बल की समुद्री क्षेत्र में पहुंच और अभियान क्षमता बढ़ाने में मदद करेगा। खास तौर पर ऐसे क्षेत्रों में इसकी उपयोगिता महत्वपूर्ण होगी, जहां सामान्य पोतों के लिए पहुंचना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। एसीवी एच-562 का डिजाइन और निर्माण भारत में ही किया गया है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इसका तटरक्षक बल में शामिल होना देश की बढ़ती स्वदेशी जहाज निर्माण क्षमता को भी दर्शाता है। इससे समुद्री सुरक्षा के लिए जरूरी प्लेटफॉर्म के निर्माण में घरेलू क्षमता को बढ़ावा मिलता है। गौरतलब है कि भारतीय तटरक्षक बल लगातार अपनी निगरानी और समुद्री सुरक्षा क्षमता को मजबूत कर रहा है। नए स्वदेशी प्लेटफॉर्म इस प्रयास का अहम हिस्सा हैं।
तटरक्षक बल की बढ़ेगी पहुंच 

एसीवी एच-562 के शामिल होने से तटरक्षक बल की परिचालन पहुंच और समुद्री क्षेत्र में तेजी से कार्रवाई करने की क्षमता को और बल मिलेगा। यह उपलब्धि आत्मनिर्भर भारत की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। देश में डिजाइन और निर्मित प्लेटफॉर्म को तटरक्षक बेड़े में शामिल करना भारत की स्वदेशी रक्षा और समुद्री निर्माण क्षमता को आगे बढ़ाता है।  दूसरी ओर वायु सेना की मजबती के लिए भी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने वायु सेना के लिए 160 सैटेलाइट स्मार्ट एंटी-एयरफील्ड हथियार यानी एसएटी-एसएएडब्ल्यू और उनसे जुड़े उपकरण खरीदने के लिए भारत डायनामिक्स लिमिटेड यानी बीडीएल के साथ करार किया है। यह अनुबंध लगभग 811 करोड़ का बताया जा रहा है।  रक्षा मंत्रालय के अनुसार, एसएटी-एसएएडब्ल्यू हवा से जमीन पर सटीक निशाना लगाने वाला ग्लाइड बम है। इसे जगुआर, हाक और सुखोई सू-30 एमकेआइ जैसे विमानों से लांच किया जा सकता है। इसमें दुश्मन के एयरफील्ड को दूर से ही नष्ट करने की क्षमता है। बता दें कि ग्लाइड बम होने के कारण यह लक्ष्य तक हवा में तैरकर पहुंचता है। सैटेलाइट गाइडेंस से सटीकता सुनिश्चित होती है। यह दुश्मन के रनवे, टैक्सीवे या अन्य एयरफील्ड सुविधाओं को भारी नुकसान पहुंचाने में सक्षम है।  एसएटी-एसएएडब्ल्यू की डिलीवरी 2027-2028 और 2028-2029 के बीच हो जाएगी। इसके वायुसेना में शामिल होने से भारतीय वायु सेना की बिना किसी रुकावट के आपरेशन जारी रखने की क्षमता बढ़ेगी और देश की रक्षा तैयारी भी मजबूत होगी। यह अनुबंध भारतीय रक्षा उद्योग की क्षमता को दर्शाता है।
डीआरडीओ द्वारा स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित इस सिस्टम में 60 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री है।