जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली। असम में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) दो-तिहाई बहुमत हासिल करने के बाद लगातार तीसरी बार राज्य में सरकार बनाने वाली है। राजग ने सोमवार को 126 सदस्यीय विधानसभा में 102 सीटों पर जीत दर्ज की। भाजपा ने 82 सीट पर जीत हासिल की जबकि उसके सहयोगी दलों बोडो पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) और असम गण परिषद (एजीपी) को 10-10 सीट पर जीत मिली है। राज्य में भाजपा ने पहली बार पने दम पर बहुमत हासिल किया है। इससे पहले 2021 ौर 2016 के चुनावों में उसने 60-60 सीटें जीती थीं।
शर्मा ने छठी बार जीता चुनाव
सम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने कांग्रेस उम्मीदवार बिदिशा नियोग को 89,434 मतों से हराकर लगातार छठी बार जालुकबारी निर्वाचन क्षेत्र से जीत हासिल की। विपक्षी खेमे में कांग्रेस ने 19 सीट जीतीं जबकि बदरुद्दीन जमल के नेतृत्व वाले एाईयूडीएफ ौर खिल गोगोई के नेतृत्व वाले रायजोर दल ने दो-दो सीट हासिल कीं। तृणमूल कांग्रेस को एक सीट पर जीत हासिल हुई। कांग्रेस के प्रदेश ध्यक्ष गौरव गोगोई जोरहाट में मौजूदा भाजपा विधायक हितेंद्रनाथ गोस्वामी से 23,181 मतों के ंतर से हार गए।
असम में भाजपा की सरकार
असम विधानसभा चुनाव 2026 के शुरूआती रुझानों में सत्तारूढ़ भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है, जो राज्य में उनकी सत्ता में वापसी का मजबूत संकेत है। शुरूआती रुझानों में असम में भाजपा की लगातार तीसरी बार सरकार बनती दिख रही है। रुझानो के अनुसार हिमंता बिस्वा सरमा भारतीय जनता पार्टी को एक बार फिर सत्ता में लाने में सफल हो गए हैं। असम में बीते 9 अप्रैल को विधानसभा चुनाव के लिए वोट डाले गए थे।
बांग्लादेशी घुसपैठ जैसे मुद्दे रहे हावी
इस बार असम चुनाव में 85.96% का भारी मतदान दर्ज किया गया है, जो जनता के बीच चुनावी मुद्दों की गंभीरता को दशार्ता है। चुनाव में मुख्य रूप से बांग्लादेशी घुसपैठ, राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी), नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए), बेरोजगारी, ब्रह्मपुत्र की बाढ़ और विकास जैसे मुद्दे हावी रहे हैं। इसके अतिरिक्त, 2023 में हुए नए परिसीमन ने भी चुनावी समीकरणों को प्रभावित किया है। यदि एनडीए इन रुझानों को अंतिम परिणामों में तब्दील कर लेता है, तो यह न केवल हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व को स्थापित करेगा, बल्कि पूरे पूर्वोत्तर भारत की राजनीति पर इसका गहरा असर पड़ेगा और भाजपा का दबदबा और अधिक मजबूत होगा।
वीआईपी सीटों की जंग और राजनीतिक गठबंधनों का दांव
असम की सत्ता का यह चुनावी संग्राम मुख्य रूप से दो प्रमुख राजनीतिक चेहरों- भाजपा के मौजूदा मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और कांग्रेस के कद्दावर नेता गौरव गोगोई के इर्द-गिर्द केंद्रित है। सरमा जहां अपनी पारंपरिक और सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली जालुकबारी सीट से मैदान में हैं और मजबूत नेतृत्व के नाम पर हैट्रिक लगाने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं कांग्रेस के गौरव गोगोई जोरहाट सीट से कड़ा मुकाबला पेश कर रहे हैं। चुनावी गठबंधनों के मोर्चे पर, भाजपा ने असम गण परिषद (एजीपी) और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) के साथ मिलकर नेडा गठबंधन के बैनर तले चुनाव लड़ा है। दूसरी ओर, कांग्रेस ने सत्ता में वापसी के लिए रायजोर दल और असम जातीय परिषद (एजेपी) के साथ अपना गठबंधन (एएसएम) तैयार किया है। इन दोनों गठबंधनों के अलावा, बदरुद्दीन अजमल की पार्टी एआईयूडीएफ इस बार अकेले ही चुनावी मैदान में है, जिसका सीधा असर दिसपुर, बिहपुरिया और शिबसागर जैसी सीटों के नतीजों पर पड़ सकता है। इसके अतिरिक्त, धुबड़ी और गोआलपाड़ा जैसे सीमावर्ती जिले घुसपैठ की चिंताओं के कारण इस चुनाव में सबसे संवेदनशील क्षेत्र बने हुए हैं।





