जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली। असम में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) 98 सीट पर आगे, जबकि कांग्रेस 25 सीट पर बढ़त बनाए हुए है। निर्वाचन आयोग की ओर से यह जानकारी दी गई। निर्वाचन आयोग ने राज्य की 126 सीट के रुझान जारी किए हैं, जिनमें भाजपा 78 सीट पर आगे है, जबकि उसके गठबंधन सहयोगी असम गण परिषद (अगप) और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) 10-10 सीट पर आगे हैं। इसके अनुसार कांग्रेस 25 सीट पर आगे है, जबकि उसकी सहयोगी रायजोर दल एक सीट पर आगे है। एआईयूडीएफ दो सीट पर और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) एक निर्वाचन क्षेत्र में आगे है। खोवांग निर्वाचन क्षेत्र में पहले आगे रहे असम जातीय परिषद के लुरिंज्योति गोगोई अब भाजपा के चक्रधर गोगोई से पीछे हो गए हैं। जालुकबारी निर्वाचन क्षेत्र में मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा आगे हैं, जबकि जोरहाट में कांग्रेस की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष गौरव गोगोई अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी भाजपा के हितेंद्रनाथ गोस्वामी से पीछे हो गए हैं। राजग के सहयोगी अगप के अध्यक्ष अतुल बोरा एवं कार्यकारी अध्यक्ष केशव महंत क्रमश: बोकाखाट और कलियाबोर में आगे हैं। चुनाव से पहले भाजपा में शामिल हुए कांग्रेस के पूर्व वरिष्ठ नेता प्रद्युत बोरदोलोई और भूपेन बोरा क्रमश: दिसपुर और बिहपुरिया निर्वाचन क्षेत्रों में आगे हैं। मंत्री रानोज पेगू, पीयूष हजारिका, अशोक सिंघल, प्रशांत फूकन और विमल बोरा भी अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में बढ़त बनाए हुए हैं।
असम में भाजपा की सरकार
असम विधानसभा चुनाव 2026 के शुरूआती रुझानों में सत्तारूढ़ भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है, जो राज्य में उनकी सत्ता में वापसी का मजबूत संकेत है। शुरूआती रुझानों में असम में भाजपा की लगातार तीसरी बार सरकार बनती दिख रही है। रुझानो के अनुसार हिमंता बिस्वा सरमा भारतीय जनता पार्टी को एक बार फिर सत्ता में लाने में सफल हो गए हैं। असम में बीते 9 अप्रैल को विधानसभा चुनाव के लिए वोट डाले गए थे।
बांग्लादेशी घुसपैठ जैसे मुद्दे रहे हावी
इस बार असम चुनाव में 85.96% का भारी मतदान दर्ज किया गया है, जो जनता के बीच चुनावी मुद्दों की गंभीरता को दशार्ता है। चुनाव में मुख्य रूप से बांग्लादेशी घुसपैठ, राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी), नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए), बेरोजगारी, ब्रह्मपुत्र की बाढ़ और विकास जैसे मुद्दे हावी रहे हैं। इसके अतिरिक्त, 2023 में हुए नए परिसीमन ने भी चुनावी समीकरणों को प्रभावित किया है। यदि एनडीए इन रुझानों को अंतिम परिणामों में तब्दील कर लेता है, तो यह न केवल हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व को स्थापित करेगा, बल्कि पूरे पूर्वोत्तर भारत की राजनीति पर इसका गहरा असर पड़ेगा और भाजपा का दबदबा और अधिक मजबूत होगा।
वीआईपी सीटों की जंग और राजनीतिक गठबंधनों का दांव
असम की सत्ता का यह चुनावी संग्राम मुख्य रूप से दो प्रमुख राजनीतिक चेहरों- भाजपा के मौजूदा मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और कांग्रेस के कद्दावर नेता गौरव गोगोई के इर्द-गिर्द केंद्रित है। सरमा जहां अपनी पारंपरिक और सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली जालुकबारी सीट से मैदान में हैं और मजबूत नेतृत्व के नाम पर हैट्रिक लगाने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं कांग्रेस के गौरव गोगोई जोरहाट सीट से कड़ा मुकाबला पेश कर रहे हैं। चुनावी गठबंधनों के मोर्चे पर, भाजपा ने असम गण परिषद (एजीपी) और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) के साथ मिलकर नेडा गठबंधन के बैनर तले चुनाव लड़ा है। दूसरी ओर, कांग्रेस ने सत्ता में वापसी के लिए रायजोर दल और असम जातीय परिषद (एजेपी) के साथ अपना गठबंधन (एएसएम) तैयार किया है। इन दोनों गठबंधनों के अलावा, बदरुद्दीन अजमल की पार्टी एआईयूडीएफ इस बार अकेले ही चुनावी मैदान में है, जिसका सीधा असर दिसपुर, बिहपुरिया और शिबसागर जैसी सीटों के नतीजों पर पड़ सकता है। इसके अतिरिक्त, धुबड़ी और गोआलपाड़ा जैसे सीमावर्ती जिले घुसपैठ की चिंताओं के कारण इस चुनाव में सबसे संवेदनशील क्षेत्र बने हुए हैं।





