जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस यानी एआई का रुख सुपर ह्यूमन की ओर बढ़ने लगा है। गूगल के एआई बॉस डेमिस हसाबीस का मानना है कि अगले 2 से 3 सालों में ही एआई इंसानी क्षमता के बराबर या उससे बेहतर काम करने लगेगा। अगर इसे सही से इस्तेमाल या कंट्रोल नहीं किया गया तो यह वह समय होगा जहां से मानव सभ्यता के पतन की कहानी की शुरुआत हो जाएगी।
हसाबीस ने की बड़ी भविष्यवाणी
गूगल डीपमाइंड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी सीईओ ने बड़ी भविष्यवाणी की है। उन्होंने पूरी दुनिया में एआई और उससे आ रहे भयानक खतरे से आगाह किया है। एआई के बारे में डेमिस हसाबिस का कहना है कि हम इंसानी इतिहास के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर हैं। अपने निजी ब्लॉग में उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस यानी एजीआई बस कुछ ही साल दूर है। मानव जैसे या उससे बेहतर क्षमता वाला सुपरह्यूमन एआई जल्द ही हकीकत बन जाएगा। इंसानियत की भलाई के लिए दुनिया को सुरक्षा मानकों और सख्त नियमों के साथ तत्काल कदम उठाने की जरूरत है। नोबेल पुरस्कार विजेता हसाबिस ने कहा कि इंसानी दिमाग की सभी संज्ञानात्मक क्षमताओं से लैस एजीआई अगले तीन से पांच वर्षों के अंदर आ सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि बिना उचित सुरक्षा उपायों के विकसित किया गया एजीआई साइबर सुरक्षा और जैविक हथियारों जैसे गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।
एआई से जुड़े खतरों पर ध्यान जरुरी
गूगल डीपमाइंड के सीईओ ने आगे कहा कि अभी एआई से जुड़े खतरों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इसके बजाय, कंपनियों और देशों के बीच एआई हथियारों की वैश्विक होड़ पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे हम एजीआई के करीब पहुंच रहे हैं, उससे जुड़े खतरों से निपटने के लिए तुरंत कदम उठाने की जरूरत है। हसाबिस ने इस दौर को इंसानियत के लिए एक नए युग की शुरुआत बताया है। एजीआई पर काम करते हुए अपनी पूरी जिंदगी बिताने के बाद, गूगल एआई के बॉस को यकीन है कि अगर इसे जिम्मेदारी से बनाया और इस्तेमाल किया जाए, तो यह अब तक की सबसे फायदेमंद और बदलाव लाने वाली प्रौद्योगिकी साबित होगी। यह बिजली या आग की खोज जैसा ही है। असल में हमने रेत से सोचने की क्षमता पैदा करने का तरीका ढूंढ लिया है। यह किसी चमत्कार से कम नहीं है। यहां रेत का मतलब कंप्यूटर चिप्स सेमीकंडक्टर से है, जो मुख्य रूप से सिलिकॉन से बने होते हैं और सिलिकॉन रेत सिलिका से ही मिलता है। इस प्रौद्योगिकी के असर का पैमाना अभूतपूर्व होगा, शायद इंडस्ट्रियल रेवोल्यूशन से 10 गुना अधिक और 10 गुना तेज होगा।
एजीआई के महत्व पर डाला प्रकाश
हसाबिस ने एजीआई के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा किया जब कोई तकनीक आती है तो वह अपने साथ सृजन और विनाश दोनों लेकर आती है। ऐसे में हर समाज और हर देश को यह देखना और परखना होगा कि इसका किस तरह से सदुपयोग और दुरपयोग किया जा सकता है। इसके सृजनात्मक पहलू की बात करें तो एजीआई हमें समाज की बड़ी समस्याओं को हल करने में मदद करेगा। इनमें तेजी से नई दवाएं खोजना, स्वच्छ ऊर्जा के नए स्रोत विकसित करना और नए एडवांस्ड मटीरियल बनाना शालिम है। हम एक ऐसे मुकाम पर भी पहुंच सकते हैं, जहां संसाधन इंसानी तरक्की के लिए रुकावट न रहें, जिससे भरपूर संसाधनों वाला एक शानदार नया दौर शुरू हो। स्पेसएक्स और एआई के संस्थापक एलन मस्क ने भी पहले ऐसी ही बातें कही हैं।





