नई दिल्ली, एजेंसी। दिल्ली स्थित सफदरजंग और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (आरडीए) ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को ज्ञापन देकर मीडिया में आई उन खबरों का हवाला देते हुए मरीजों के अधिकारों की रक्षा के लिए हस्तक्षेप की अपील की जिनमें दावा किया गया है कि जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को अपने उपचार के बारे में निर्णय लेने में सक्षम मरीज होने के बावजूद चिकित्सकीय सलाह के विरुद्ध अस्पताल छोड़ने की अनुमति नहीं दी गई। वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज एवं सफदरजंग अस्पताल की आरडीए ने सोमवार को राष्ट्रपति को सौंपे ज्ञापन में कहा कि यदि ये खबरें तथ्यात्मक रूप से सही हैं, तो वे सूचित सहमति, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े गंभीर प्रश्न खड़े करती हैं। एसोसिएशन ने कहा कि अस्पताल उपचार और देखभाल के केंद्र हैं, न कि किसी को हिरासत में रखने के स्थान। केवल उन्हीं परिस्थितियों में ऐसे प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं, जिनकी कानून स्पष्ट रूप से अनुमति देता हो और जिन्हें विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत लागू किया गया हो। आरडीए ने राष्ट्रपति से संवैधानिक अधिकारों, चिकित्सकीय नैतिकता, मरीजों की स्वायत्तता और सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों की स्वतंत्रता के संरक्षण के लिए हस्तक्षेप करने का आग्रह किया।
इसके साथ ही, एसोसिएशन ने जंतर-मंतर पर हुई घटनाओं की स्वतंत्र जांच की भी मांग की। उसका कहना है कि वांगचुक को वहीं से बलपूर्वक सफदरजंग अस्पताल लाया गया था। एसोसिएशन ने वांगचुक को लगातार अस्पताल में भर्ती रखे जाने पर गहरी चिंता व्यक्त की। ज्ञापन में कहा गया, सोनम वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति और उन्हें अस्पताल में भर्ती रखने की आवश्यकता का निर्णय स्वतंत्र चिकित्सकीय आकलन का विषय है। लेकिन अस्पताल में भर्ती प्रत्येक व्यक्ति का सबसे पहला अधिकार यह है कि उसके साथ गरिमा और संवेदनशीलता के साथ व्यवहार किया जाए तथा उसका उपचार स्थापित चिकित्सा नैतिकता और भारतीय संविधान के अनुरूप किया जाए। आरडीए ने वांगचुक के सफदरजंग अस्पताल में रहने के दौरान वहां असाधारण सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर भी चिंता प्रकट की। ज्ञापन में मीडिया में आई खबरों और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध वीडियो का हवाला देते हुए कहा गया कि अस्पताल के कुछ हिस्सों तक लोगों की पहुंच सीमित कर दी गई, भवन के कुछ भागों को सील कर दिया गया, कई मंजिलों पर बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए और अस्पताल के नियमित कामकाज पर भी प्रतिबंध लगाए गए। एम्स की रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन ने भी मंगलवार को राष्ट्रपति को पत्र लिखकर एक दिन पहले जंतर-मंतर पर हुई घटनाओं की स्वतंत्र और समयबद्ध जांच कराने का अनुरोध किया। राष्ट्रपति को 20 जुलाई को सौंपे गए अपने ज्ञापन में एसोसिएशन ने कहा, छात्रों, डॉक्टरों और युवा नागरिकों सहित बड़ी संख्या में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ लाठीचार्ज, आंसू गैस के गोले दागे जाने और बल प्रयोग किए जाने की खबरें बेहद चिंताजनक हैं। पत्र में कहा गया, हालांकि घटना के कुछ पहलू अब भी विवादित हैं, लेकिन सार्वजनिक रूप से उपलब्ध वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान इस बात पर गंभीर सवाल उठाते हैं कि शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध-प्रदर्शन से किस तरह निपटा गया। आरडीए ने उन वीडियो का भी उल्लेख किया, जिनमें पुलिसकर्मी अपने चेहरे और वर्दी पर लिखे नाम को ढके दिखाई दे रहे हैं।





