भारतीय सेना को मिलेंगे 9 महा विनाशक हथियार, डीएसी परिषद की बैठक में मंजूरी

जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। भारतीय सेनाओं को 9 ऐसे नए महा-हथियार मिलने वाले हैं जो बिना शोर मचाए दुश्मन का सफाया कर देंगे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया है। बैठक में 1 लाख लाख 10 हजार करोड़ के बजट को मंजूरी दी गई है। इस सौदे में रडार, जामर से लेकर एंटी-टैंक माइन्स तक की खरीद की जाएगी।
रक्षा प्रस्तावों को मंजूरी

 

रक्षा अधिग्रहण परिषद यानी डीएसी ने करीब 1 लाख 10 हजार करोड़ रुपये के रक्षा प्रस्तावों को मंजूरी दी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में विभिन्न सैन्य उपकरणों और प्रणालियों की खरीद के लिए आवश्यकता की स्वीकृति यानी एओएन को मंजूरीद दी गई। सबसे बड़ी बात यह है कि कुल मंजूर प्रस्तावों में करीब 98 फीसदी खरीद भारतीय उद्योग से की जाएगी। इससे एक बात साफ हो जाती है कि अब रक्षा क्षेत्र में मेड इन इंडिया का तगड़ा स्वैग नजर आएगा। इस प्रस्ताव में थल सेना, नेवी और एयरफोर्स तीनों को एक साथ 9 ऐसे खतरनाक दिव्यास्त्र मिलेंगे जो दुश्मन के होश उड़ाने के लिए काफी हैं। इसमें दुश्मनों के रडार को अंधा करने वाले जीबीएमपी जामर्स, हवा में बाज की तरह मंडराने वाले एएलएच हेलीकॉप्टर शामिल है। इसके अलावा समंदर की निगेहबानी करने वाले अरुध्रा रडार, और मिनटों में रास्ता साफ करने वाले एंटी-टैंक माइन लेयर्स को इस सौदे में खास जगह दी गई है। 
थलसेना के होगी बड़ी खरीद

तीनों सेनाओं के वर्गीकरण की बात करें तो थलसेना के लिए रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल और परमाणु (सीबीआरएन) टोही वाहन खरीदे जाएंगे। इसके अलावा हाई मोबिलिटी वाहन, स्वचालित यांत्रिक माइन लेयर, एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (एएलएच), ट्रॉल टैंक और सर्वत्र ब्रिज सिस्टम की खरीद को मंजूरी दी गई है। सीबीआरएन टोही वाहन दूषित इलाकों में रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल और परमाणु एजेंटों का पता लगाने, उनकी पहचान करने, निगरानी और ऐसे क्षेत्रों को चिह्नित करने में सक्षम होंगे। वीहं हाई मोबिलिटी वाहन कठिन इलाकों में सेना की आवाजाही और लॉजिस्टिक क्षमता बढ़ाएंगे। माइन लेयर मुश्किल क्षेत्रों में तेजी से बारूदी सुरंगें बिछाने की क्षमता बढ़ाएंगे। एएलएच हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल थलसेना और वायुसेना के लिए अलग-अलग इलाकों और परिचालन परिस्थितियों में जटिल अभियानों में किया जाएगा। ट्रॉल टैंक और सर्वत्र ब्रिज सिस्टम अभियान के दौरान अलग-अलग इलाकों में लड़ाकू इकाइयों के लिए रास्ता और नदी-नाले पार करने की सुविधा उपलब्ध कराएंगे। नौसेना के लिए अरुध्रा रडार की खरीद और मरीन गैस टर्बाइन के डिजाइन, विकास तथा बाद में खरीद को मंजूरी मिली है। अरुध्रा रडार नौसेना के विभिन्न हवाई स्टेशनों पर मौजूदा एयर रूट सर्विलांस रडार की जगह लगाए जाएंगे। वहीं, मरीन गैस टर्बाइन युद्धपोतों की प्रणोदन प्रणाली है। इसके विकास से विदेशी कंपनियों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। इसी तरह वायुसेना के लिए लड़ाकू विमानों, परिवहन विमानों और हेलिकॉप्टरों की युद्ध क्षमता बढ़ाने से जुड़े कई प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। ग्राउंड-बेस्ड मल्टी-पर्पज जैमर और डिफेंस फोर्सेज सिक्योर एक्सेस कार्ड प्रणाली की खरीद व स्थापना को भी स्वीकृति मिली। ग्राउंड-बेस्ड मल्टी-पर्पज जैमर दुश्मन के रडार को प्रभावी तरीके से जाम करने में सक्षम होगा। वहीं, डिफेंस फोर्सेज सिक्योर एक्सेस कार्ड मौजूदा कागजी पहचान पत्र, पास और परमिट की जगह रेडियो फ्रीक्वेंसी पहचान आधारित स्मार्ट कार्ड प्रणाली लागू करेगा।