एक के एक कमीशन हो रहें युद्धपोत, जल्द मिलेगा एक और युद्धपोत

जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। भारतीय नौसेना को एक और युद्धपोत मिलने वाला है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है एक युद्धपोत कमीशन होता है तो दूसरा तैयार हो जाता है। जुलाई यानी इस महीने में ही पहले 11 जुलाई को आईएनएस महेंद्रगिरि लांच हुआ था अब उसके बाद मालवान लांच होने जा रहा है। 
वॉरशिप की फैक्ट्री बन भारत 

ऐसा लगता है कि भारत वॉरशिप की फैक्ट्री बन गया है। पीएम मोदी की नीतियों से भारतीय नौसेना ने 76 प्रतिशत स्वदेशीकरण हासिल कर लिया है। आईएनएस विक्रांत, ब्रह्मोस, बीईएल, सीईएस जैसी उपलब्धियां इसका गवाह हैं। सरकार ने 2030 तक 95 प्रतिशत स्वदेशीकरण का लक्ष्य तय किया है। इसका चौतरफा फायदा हो रहा है। इससे न केवल देश की सुरक्षा मजबूत हो रही है बल्कि नौसेना की स्वदेशी परियोजनाओं ने लाखों नौकरियां सृजित कीं और अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा दी है। अब इस दिशा में भारत ने एक और कदम आगे बढ़ा दिए हैं।  आईएनएस महेंद्रगिरि के बाद अब अब स्वदेशी एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट आईएनएस मालवान नौसेना की ताकत बढ़ाने के लिए तैयार है। 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी उपकरणों से लैस यह युद्धपोत दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने, तटीय सुरक्षा और समुद्री निगरानी में अहम भूमिका निभाएगा।
22 जुलाई को मिलेगा मालवन 

नौसेना 22 जुलाई को मालवन नामक अत्याधुनिक एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट को औपचारिक रूप से अपने बेड़े में शामिल करेगी। यह माहे श्रेणी का दूसरा पोत है, जिसे उथले समुद्री क्षेत्रों में पनडुब्बी रोधी अभियानों के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है। बता दें कि मालवन का निर्माण कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (सीएसएल), कोच्चि में किया गया है। यह पोत आधुनिक युद्धपोत निर्माण और डिजाइन के क्षेत्र में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता का प्रतीक माना जा रहा है। इस युद्धपोत में 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी उपकरण और तकनीक का उपयोग किया गया है, जो भारत की घरेलू रक्षा निर्माण क्षमता और अत्याधुनिक युद्धपोत डिजाइन में बढ़ती विशेषज्ञता को दर्शाता है।
ऐतिहासिक तटीय शहर पर नामकरण

बता दें कि इसका नामकरण महाराष्ट्र के ऐतिहासिक तटीय शहर मालवन से लिया गया है। यह छत्रपति शिवाजी महाराज की समृद्ध समुद्री विरासत और सिंधुदुर्ग किले के लिए जाना जाता है। भारतीय नौसेना अपने कई युद्धपोतों के नाम भारत के ऐतिहासिक और सामरिक महत्व वाले तटीय क्षेत्रों और शहरों के नाम पर रखती है। नौसेना ने भी अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर मालवान की तस्वीरें साझा करते हुए इसकी डिलीवरी की जानकारी दी है। पोस्ट में युद्धपोत के बाहरी स्वरूप, आधुनिक हथियार प्रणालियों और समुद्री परीक्षणों की झलक दिखाई गई है। नौसेना ने इसे स्वदेशी रक्षा निर्माण और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। इंस्टाग्राम पर साझा तस्वीरों में जहाज की स्टेल्थ डिजाइन, हथियार प्रणालियां और परिचालन क्षमता भी दिखाई गई हैं।
आत्मनिर्भर भारत अभियान की पहल

मालवन की विशेषताओं के बारे में बात करें तो यह युद्धपोत आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत विकसित आधुनिक स्वदेशी युद्धपोत है। आधुनिक सोनार प्रणाली से लैस, जो पानी के भीतर पनडुब्बियों का पता लगाने में सक्षम है। इसे पनडुब्बियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए टॉरपीडो और अन्य आधुनिक हथियार प्रणालियों से सुसज्जित किया गया है। भारतीय नौसेना के स्वदेशी युद्धपोत बेड़े को और अधिक आधुनिक और सक्षम बनाएगा। यह युद्धपोता माहे श्रेणी का है। यह मुख्य रूप से उथले समुद्री क्षेत्रों में पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने के लिए विकसित किए किया गया है। आकार में अपेक्षाकृत छोटे होने के बावजूद मालवन तेज गति, फुर्ती, सटीक संचालन क्षमता और लंबी परिचालन क्षमता से लैस है। मालवन के नौसेना में शामिल होने के साथ भारत को स्वदेशी रूप से विकसित नई पीढ़ी के उथले जल क्षेत्र में संचालन करने वाले युद्धपोतों की श्रृंखला में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि मिलेगी। यह पोत भारतीय नौसेना की समुद्री सुरक्षा, तटीय रक्षा और आत्मनिर्भर रक्षा निर्माण की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार मालवन के नौसेना में शामिल होने से स्वदेशी पनडुब्बी रोधी युद्धपोतों की नई पीढ़ी का विस्तार होगा। यह देश की रक्षा निर्माण क्षमता, स्वदेशी जहाज निर्माण तकनीक और नौसेना के आधुनिकीकरण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है। मालवन के कमीशनिंग समारोह की अध्यक्षता वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह करेंगे।