जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली। चीन दौरे से लौटे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बेहद गुस्से में दिखाई दे रहे हैं। बीजिंग से आए ट्रंप ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से करीब आधे घंटे तक बात की। इसके बाद उन्होंने टॉप लेवल की मीटिंग में महाजंग-2 का इशारा कर दिया। बैठक के दौरान ट्रंप ने साफ तौर पर कहा कि इस बार की जंग में ईरान के पास कुछ नहीं बचेगा। यह भीषण युद्ध होगा।
ट्रंप के तेवर बेहद आक्रामक
चीन का दौरा कर अमेरिका लौटे डोनाल्ड ट्रंप के तेवर बेहद आक्रामक दिखाई दे रहे हैं। जानकारों का कहना है कि इसके पीछे युद्ध में अमेरिका की विफलता है। ऐसे में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले तो प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बात की। यह बातचीत आधे घंटे से अधिक चली और इजरायल की सुरक्षा कैबिनेट की बैठक शुरू होने से कुछ ही समय पहले समाप्त हुई। दोनों नेताओं ने ईरान पर चर्चा की और ट्रंप ने नेतन्याहू को चीन यात्रा के बारे में जानकारी दी। जानकारों का मानना है कि ईरान पर हमले का मुद्दा अभी अनसुलझा है। राष्ट्रपति को अभी फैसला लेना बाकी है।
आगे की रणनीति पर चर्चा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जिस नेशनल सिक्योरिटी टीम के टॉप अधिकारियों से मुलाकात की, उसका मकसद ईरान जंग को लेकर आगे की रणनीति पर चर्चा करना था। रिपोर्ट के अनुसार यह मीटिंग काफी अहम है। उन्होंने तेहरान को चेतावनी देते हुए कहा कि उन्हें जल्द से जल्द कदम उठाने होंगे और वह भी तेजी से, वरना उनके पास कुछ भी बचेगा। बैठक के बाद ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा कि ईरान के लिए घड़ी की सुइयां तेजी से भाग रही हैं। समझौते का समय लगभग बीत चुका है। उन्हें जल्द से जल्द तेजी से कदम उठाने होंगे, वरना उनका कुछ भी बाकी नहीं बचेगा। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार राष्ट्रपति के वर्जीनिया स्थित गोल्फ क्लब में हुई इस मीटिंग में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विदेश मंत्री मारको रूबियो, सीआईए निदेशक जॉन रैटक्लिफ और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ जैसे नेता सभी शामिल हुए। यह बैठक ट्रंप के चीन के एक बेहद अहम दौरे से वापस वॉशिंगटन लौटने के महज कुछ ही घंटों बाद की। गौर करने वाली बात यह है कि चीन एक ऐसा देश है, जिसके ईरान के साथ बेहद करीबी संबंध हैं।
अब जवाब देने लगा है ट्रंप का सब्र
सूत्रों की मानें तो तेहरान जिस तरह से कूटनीतिक बातचीत को संभाल रहा है, उसको लेकर ट्रंप का सब्र अब जवाब देने लगा है। इसके अलावा, होर्मुज स्ट्रेट के लगातार बंद रहने और वैश्विक तेल कीमतों पर इसके असर से भी वह काफी परेशान हैं। बीजिंग यात्रा के दौरान, ट्रंप और उनकी टीम ने तेहरान के साथ आगे कैसे बढ़ना है, इस पर कई बातें रखी। रिपोर्ट के अनुसार प्रशासन के कई अधिकारियों ने बताया कि वे आगे का रास्ता तय करने से पहले यह देखना चाहते थे कि ट्रंप और चीनी नेता शी जिनपिंग के बीच बातचीत का क्या नतीजा निकलता है। रिपोर्ट के मुताबिक, हाल के दिनों में ट्रंप ने ईरान में बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान फिर से शुरू करने के विकल्प पर ज्यादा गंभीरता से विचार किया है। उनका लक्ष्य ईरान पर दबाव डालकर जंग खत्म करने के लिए उन्हें किसी समझौते पर राजी करना है।
ईरान के सामने रखी 5 बड़ी शर्तें
बैठक के दौरान ट्रंप ने ईरान के सामने 5 बड़ी शर्तें रखी हैं। इरान की फार्स न्यूज एजेंसी के मुताबिक, इन शर्तों में अमेरिका प्रतिबंधों और अपनी नीतियों से ईरान को हुए नुकसान के लिए किसी भी तरह का मुआवजा नहीं देगा। ईरान 400 किलोग्राम इन रिच्ड यूरेनियम वाशिंगटन को सौंप दें। ईरान अपने कुल परमाणु सुविधाओं यानी न्यूक्लियर फेसिलिटी में से सिर्फ एक को ही सक्रिय रख सकता है। अमेरिका ने ईरान की विदेशों में जमा संपत्तियों का 25% हिस्सा भी वापस जारी करने से इनकार कर दिया है। अमेरिका ने विभिन्न मोर्चों पर संघर्ष को खत्म करने के लिए बातचीत में प्रगति और समापन पर जोर दिया है।





