चरम पर पहुंचा अमेरिका और ईरान के बीच तनाव, दुनिया को सताने लगा नया डर

जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। आखिरकार जिसका डर था वहीं हुआ। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर युद्ध के मुहाने पर पहुंच गया है। हॉर्मुज स्ट्रेट में तीन कॉमर्शियल जहाजों पर हमले के बाद अमेरिकी सेना ने ईरान के 80 से ज्यादा सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर एयरस्ट्राइक की है। इसके अलावा अमेरिका ने तेल बिक्री की अनुमति देने वाला ईरान का लाइसेंस रद्द कर दिया है। इससे पूरी दुनिया में फिर से गैस व तेल संकट गहराने का खतरा बढ़ गया है।
पश्चिम एशिया में फिर बढ़ा तनाव 


पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। अमेरिका ने आज सुबह ईरान के खिलाफ सैन्य हमले शुरू कर दिए हैं। अमेरिका ने यह कार्रवाई ईरान पर होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे तीन वाणिज्यिक जहाजों पर हमला करने का आरोप लगाने के बाद की है। दूसरी ओर, ईरानी सरकारी मीडिया ने देश के दक्षिणी हिस्सों में कई धमाकों की जानकारी दी है। इस बारे में अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया पर बताया कि उसकी सेनाओं ने ईरान पर जोरदार हमले शुरू किए हैं। 
ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम पर हमला

अमेरिकी सेना के अनुसार इन हमलों में ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, कमांड एंड कंट्रोल सेंटर, तटीय रडार स्टेशन और एंटी-शिप को निशाना बनाया गया है। इसके अलावा मिसाइल लॉन्चर, ड्रोन लॉन्च साइट और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की 60 से ज्यादा तेज स्पीड बोट्स पर भी हमले  किए गए हैं। इसके अलावा बंदर अब्बास, केश्म द्वीप और सीरिक के आसपास मौजूद कई सैन्य ठिकानों पर भी हमले किए गए। यह सिलसिला यहीं नहीं रुका। अमेरिकी सेना ने बंदर अब्बास में शहीद हक्कानी पोर्ट पर भी हमला किया है।  अमेरिका सेना ने ताजा हमलों के बारे में कहा कि कुछ घंटे पहले हॉर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे तीन कॉमर्शियल जहाजों, मार्शल आइलैंड्स के एम/टी अल रेकय्यात, सऊदी अरब के एम/टी वेदयान और लाइबेरिया के एम/टी साइप्रस प्रॉस्पेरिटी पर हमला किया गया था। वॉशिंगटन ने इन हमलों के लिए सीधे ईरान को जिम्मेदार ठहराया और इसे युद्धविराम का उल्लंघन माना। 
तेल प्रतिबंधों से दी गई छूट खत्म

सबसे बड़ी बात तब हुई जब इन हमलों के कुछ ही घंटों बाद अमेरिका ने बड़ा ऐलान कर दिया। उसने ईरान को तेल प्रतिबंधों से दी गई 60 दिनों की छूट का लाइसेंस रद्द कर दिया। यह लाइसेंस पिछले महीने अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने जारी किया था, जो 21 अगस्त तक वैध था। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ईरान की यह हरकत अस्वीकार्य है और इसके परिणामों का सामना करना होगा। बता दें कि यह तनाव ऐसे समय में बढ़ा है जब अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत रुकी हुई है। अमेरिका इस बातचीत के जरिए होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खुलवाना, ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकना और 28 फरवरी से शुरू हुए युद्ध को समाप्त करना चाहता था। इस घटनाक्रम के बाद पूरी दुनिया के देशों की चिंताएं बढ़ गई हैं। एक बार फिर होर्मुज के ब्लाक होने का खतरा बढ़ गया गया है। वहीं हमले के बाद ईरान विदेश मंत्रालय ने ट्वीट किया। इसमें लिखा गया कि इस्लामिक रिपब्लिक आॅफ ईरान अपने राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएगा। अमेरिका के हमले के बीच ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के जनाजे का कार्यक्रम भी जारी है। उनका पार्थिव शरीर तेहरान से कोम और फिर इराक के नजफ ले जाया गया। यहां हजारों लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। अंतिम संस्कार में ईरान और इराक के कई शीर्ष नेता शामिल हुए।