जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। भारतीय वैज्ञानिकों ने दुर्लभ न्यूट्रॉन स्टार से निकला हैरान कर देने वाला नजारा देखा है। भारत के अपग्रेडेड जीएमआरटी टेलीस्कोप की मदद से रिसर्चर्स ने पीएसआर जे1227-4853 नाम के पल्सर को ट्रैक किया है। इस तारे ने महज एक घंटे के भीतर 114 बेहद ताकतवर जायंट पल्स छोड़े हैं। यह असामान्य घटना फास्ट रेडियो बर्स्ट्स यानी एफआरबी के रहस्य को सुलझाने में मददगार साबित हो सकती है।
आसमान में नजर आते हैं तारे
जब भी हम आसमान की ओर देखते हैं, तो हमें हजारो टिमटिमाते तारे नजर आते हैं। वहीं जब वायुमंडल प्रदूषण मुक्त रहता है तो कई बार हमें आकाशगंगा के हिस्से भी देखने को मिल जाते हैं। ऐसे में दूरबीन का प्रयोग करके आप इनकी गहराइयों को भी देख सकते हैं। अंतरिक्ष में कई ऐसी वस्तुएं होती हैं, जिन्हें हम केवल अपनी आंखों से नहीं देख सकते हैं। इनके लिए हमें खास तरह के टेलिस्कोप की जरूरत होती है, वहीं कई चीजें आॅप्टिकल टेलिस्कोप से नहीं दिखती हैं। इन्हें देखने के लिए रेडियो टेलिस्कोप की जरूरत पड़ती है। अब भारतीय वैज्ञानिकों ने टेलिस्कोप की मदद से अंतरिक्ष में एक बेहद दुर्लभ न्यूट्रॉन स्टार की आक्रामक गतिविधि रिकॉर्ड की है। पुणे स्थित जायंट मीटरवेव रेडियो टेलीस्कोप यानी जीएमआरटी के डेटा से पता चला है कि पीएसआर जे1227-4853 नाम के एक खास पल्सर ने महज 60 मिनट के भीतर 114 अत्यधिक चमकीले जायंट पल्स छोड़े हैं। यह पल्सर कोई साधारण तारा नहीं है, बल्कि अपनी अवस्था बदलने वाला एक बेहद रेयर ट्रांजिशनल मिलीसेकंड पल्सर है। इस तरह के तारे पूरे ब्रह्मांड में उंगलियों पर गिने जा सकते हैं। द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल में पब्लिश हुई इस रिसर्च ने अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में तहलका मचा दिया है। हैरानी वाली बात यह है कि यह महज 30 मिलीसेकंड से भी कम समय में अपना एक पूरा चक्कर लगा लेता है। यह खास पल्सर तो सिर्फ 1.69 मिलीसेकंड में एक रोटेशन पूरा कर लेता है। इसका मतलब यह एक सेकंड में कई सौ बार घूम जाता है। इस तारे की सबसे अनोखी बात इसका गिरगिट जैसा स्वभाव है। यह एक ट्रांजिशनल मिलीसेकंड पल्सर है, जो अपनी दो अलग-अलग अवस्थाओं के बीच लगातार बदलता रहता है। कभी यह एक्स-रे सिस्टम की तरह व्यवहार करता है, तो कभी अचानक रेडियो पल्सर बन जाता है। पूरे ब्रह्मांड में अब तक ऐसे सिर्फ तीन तारों की ही पुष्टि हो पाई है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह अनोखी खोज ब्रह्मांड के सबसे बड़े रहस्यों में से एक, फास्ट रेडियो बर्स्ट्स की गुत्थी सुलझाने की चाबी बन सकती है। बता दें कि न्यूट्रॉन स्टार किसी बड़े तारे के खत्म होने के बाद बचने वाला बेहद घना अवशेष होते हैं। जब यह तारा अपनी धुरी पर बहुत तेजी से घूमता है, तब इसे मिलीसेकंड पल्सर कहा जाता है।
174 घंटों के डेटा का गहन एनालिसिस
नेशनल सेंटर फॉर रेडियो एस्ट्रोफिजिक्स यानी एनसीआरए के साइंटिस्ट सप्तऋषि सरकार और उनकी टीम ने जीएमआरटी के 174 घंटों के डेटा का गहन एनालिसिस किया। इस रिसर्च में करीब पांच सालों का डेटा खंगाला गया। रेडियो तरंगों के बैकग्राउंड शोर को हटाने के बाद साइंटिस्ट्स को 235 असली जायंट पल्स मिले। ये पल्स आम सिग्नल्स के मुकाबले दस हजार गुना ज्यादा चमकदार और ताकतवर थे। सबसे बड़ा कौतूहल 6 दिसंबर 2020 के आॅब्जर्वेशन में देखने को मिला। उस दिन इस पल्सर ने अचानक अपना भयानक रूप दिखाया। इसने महज एक घंटे के भीतर 114 जायंट पल्स उगल दिए। यह दर इतनी तेज थी कि डेटा मॉनिटर कर रहे वैज्ञानिक भी सन्न रह गए। ये धमाके महज एक माइक्रोसेकंड यानी सेकंड के दस लाखवें हिस्से जितने छोटे थे, लेकिन इनसे निकलने वाली एनर्जी ने सबको हैरत में डाल दिया।





