जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। राशन वितरण प्रणाली में सरकार आमूल-चूल परिवर्तन करने जा रही है। ऐसा धांसू सिस्टम तैयार किया जो राशन डीलर समेत अन्य घपलेबाजों को घोटाले का कोई मौका नहीं देगा। इस योजना के तहत अब कार्डधारक के खाते में राशन के पूरे पैसे आएंगे। लोग इससे उससे सिर्फराशन ही खरीद पाएंगे। वहीं छत्तीसगढ़ सरकार अनाज एटीएम सुर्खियां बटोर रहा है। इस पूरे सिस्टम को जानने के लिए देखिए हमारा पूरा वीडियो।
डिजिटल हो रही राशन वितरण व्यवस्था
देश में सरकारी राशन वितरण व्यवस्था धीरे-धीरे डिजिटल और तकनीक आधारित होती जा रही है। राशन की दुकानों पर लगने वाली लंबी कतारों और तय समय की परेशानी को कम करने के लिए अब पारंपरिक वितरण व्यवस्था के साथ नई तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसी दिशा में
स्वंतत्रता दिवस से ठीक एक दिन पहले यानी 14 अगस्त से केंद्र सरकार राशन की सब्सिडी डिजिटल रूपी के जरिए सीधे लाभार्थियों के वॉलेट में भेजने जा रही है। पायलट योजना के तहत सबसे पहले केंद्रशासित प्रदेश चंडीगढ़ और दादर एवं नगर हवेली से इसकी शुरुआत की जाएगी। इस योजना का मकसद प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत तहत दी जाने वाली खाद्य सब्सिडी की चोरी और दुरुपयोग को रोकना है। इस स्कीम की सबसे बड़ी खासियत ही यह है कि यह पर्पज बाउंड या उद्देश्य निर्धारित है। यानी कि वॉलेट में सरकार द्वारा भेजी जाने वाली डिजिटल करेंसी का उपयोग सिर्फ गेहूं और चावल जैसे अनाज खरीदने के लिए ही किया जा सकता है। लाभार्थी इससे राशन के अलावा कोई और चीज नहीं खरीद पाएंगे।
पीएमजीकेएवाई के तहत बनी योजना
बता दें कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना पीएमजीकेएवाई के तहत अब तक लोगों को सस्ता या मुफ्त राशन मिलता था। इसके अलावा लोगों के बैंक खातों में सब्सिडी भेजी जाती थी। ऐसे में अकसर बैंक खाते में भेजे जाने वाले पैसे से लोग कुछ और खरीद लेते हैं या अपने निजी शौक में उड़ा देते हैं। डिजिटल रूपी के इस नए मॉडल में पैसा प्रोग्रामेबल होगा। इसका मतलब सरकार जो डिजिटल रूपी भेजेगी, उसमें एक कमांड सेट होगी। लाभार्थी इस पैसे को सिर्फ और सिर्फ सरकारी राशन की दुकानों पर ही खर्च कर पाएगा। वॉलेट में भेजा गया पैसा सिर्फ राशन के दुकानों में लगे क्यूआर कोड पर ही स्कैन और ट्रांसफर हो पाएगा। बता दें कि सबसे पहले पुडुचेरी और गुजरात में इसकी शुरूआत की गई थी, वहां इसके सफल ट्रायल के बाद अब दो केंद्र शासित प्रदेशों में यह मॉडल लागू किया जा रहा है। अब सबसे अहम सवाल है कि यह योजना किस तरह से काम करेगी। सबसे पहले स्कीम का लाभ उठाने के लिए लाभार्थियों को अपने स्मार्टफोन में डिजिटल रुपया एप्लीकेशन को डाउनलोड करना होगा। इसके बाद इसे एक्टिवेट करना होगा। इसके बाद अपने किसी नजदीकी राशन आॅफिस या इसके लिए अलग से लगाए जा रहे कैंपों में जाकर अपना आधार-लिंक्ड मोबाइल नंबर सबमिट कर केवाईसी और रजिस्ट्रेशन कराना होगा। किसी भी सहायता या जानकारी के लिए विभाग के टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1800-180-2068 पर भी संपर्क किया जा सकता है। यहां सबसे ज्यादा ध्यान देने वाली बात यह हैकि वॉलेट में आए राशन के पैसे आपको एक महीने में खर्च करने होंगे। यानी यह रकम एक महीने के लिए ही वैलिड रहेगी। अगर लाभार्थी इस महीने के भीतर राशन नहीं खरीदता है, तो यह पैसा अपने आप ही वापस सरकार के खाते में चली जाएगीञ। हर एक डिजिटल ट्रांजैक्शन का रियल-टाइम डिजिटल रिकॉर्ड रहता है, जिससे सरकार को यह ट्रैक करने में आसानी रहती है कि किस व्यक्ति ने राशन लिया है और किसने नहंी।
पैसे नहीं खा पाएगा बिचौलिया
इस योजना के लागू होने के बाद अब बीच में कोई अफसर, बैंक कर्मचारी या बिचौलिया पैसे नहीं खा पाएगा। सरकार के खजाने से निकला पैसा सीधा लाभार्थी के मोबाइल वॉलेट में पहुंचेगा। इससे सरकारी फंड के दुरुपयोग पर पूरी तरह से रोक लगेगी। बैंकों का सर्वर डाउन होने, छुट्टियां होने या खाते में पैसे अटकने का झंझट भी नहीं रहेगा। डिजिटल रूपी तकनीक बेहद फास्ट है। इससे पैसा तुरंत और सुरक्षित तरीके से ट्रांसफर किया जा सकेगा। राशन कोटेदार को नकद पैसे देने या छुट्टे पैसों के लिए बहस करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। वॉलेट से सुरक्षित तरीके से भुगतान हो जाएगा। दूसरी ओर छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा शुरू की गई अन्नपूर्ति ग्रेन एटीएम की भी खूब चर्चा हो रही है। इसे भी राशन प्रणाली में धांधली रोकने की दिशा में बड़ा महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस मशीन के जरिए पात्र लाभार्थी बैंक एटीएम की तर्ज पर निर्धारित मात्रा में खाद्यान्न प्राप्त कर सकेंगे। अन्नपूर्ति ग्रेन एटीएम का इस्तेमाल करने की प्रक्रिया को काफी सरल बनाई गई है। लाभार्थी को मशीन की स्क्रीन पर आधार नंबर या राशन कार्ड नंबर दर्ज करना होगा। इसके बाद बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण किया जाएगा। पहचान और पात्रता का सत्यापन पूरा होने के बाद लाभार्थी के लिए निर्धारित मात्रा में चावल मशीन से निकलने लगेगा। इस प्रक्रिया में लाभार्थी की पहचान को डिजिटल तरीके से सत्यापित होगी। अन्नपूर्ति ग्रेन एटीएम की भंडारण क्षमता करीब 2500 किलोग्राम तक है। मशीन में चावल की लोडिंग स्वचालित प्रणाली के जरिए की जाएगी। इस व्यवस्था को खाद्यान्न वितरण में तकनीक और आॅटोमेशन के इस्तेमाल के तौर पर देखा जा रहा है। इस व्यवस्था की महत्वपूर्ण विशेषता वन नेशन, वन राशन कार्ड योजना से इसका जुड़ाव है। सबसे बड़ी बात यह है कि छत्तीसगढ़ के अलावा दूसरे राज्यों के राशन कार्ड धारक भी बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के जरिए यहां खाद्यान्न प्राप्त कर सकेंगे।
ग्रेन एटीएम की शुरूआत
ग्रेन एटीएम की शुरूआत का मतलब यह नहीं है कि देशभर की राशन दुकानें तत्काल खत्म हो जाएंगी। फिलहाल यह तकनीकी पहल है। इसके परिणामों के आधार पर भविष्य में ऐसी मशीनों का विस्तार दूसरे क्षेत्रों में किया जाएगा। इस प्रणाली के लागू होने के बाद राशन व्यवस्था में भविष्य में बड़े समानांतर बदलाव देखने को मिल सकते हैं। राशन एटीएम का सबसे बड़ा असर उन लोगों पर पड़ सकता है जिनके लिए राशन लेने के लिए काम छोड़कर दुकान पर घंटों इंतजार करना मुश्किल होता है। दैनिक मजदूर, प्रवासी श्रमिक, बुजुर्ग और ऐसे परिवार जिनके लिए राशन दुकान के निर्धारित समय में पहुंचना कठिन है, उनके लिए 24 घंटे उपलब्धता रहेगी। इसके अलावा, वन नेशन, वन राशन कार्ड के तहत दूसरे राज्य के लाभार्थियों को सुविधा मिलने से देश में श्रमिकों की बढ़ती आवाजाही के बीच राशन की पोर्टेबिलिटी और महत्वपूर्ण हो जाती है। जानकारों की मानें तो डिजिटल राशन व्यवस्था के फायदे जितने बड़े हैं, इसकी चुनौतियां भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं। मशीन खराब होने, बिजली या इंटरनेट की समस्या होने पर लोगों को परेशानी हो सकती है। वही बायोमेट्रिक पहचान में दिक्कत, आधार से जुड़ी जानकारी में गड़बड़ी या स्टॉक खत्म होने जैसी स्थिति सामने आ सकती है। कुल मिलाकर देखा जाए तो राशन एटीएम की शुरूआत केवल एक मशीन लगाने की कहानी नहीं है। यह उस बदलाव की ओर संकेत करती है जिसमें सरकारी कल्याण योजनाओं में लाभार्थी की पहचान से लेकर लाभ के वितरण तक पूरी प्रक्रिया अधिक डिजिटल और डेटा आधारित हो सकती है। आज जहां राशन कार्ड और उचित मूल्य की दुकान सार्वजनिक वितरण प्रणाली की पहचान हैं, वहीं भविष्य में आधार आधारित प्रमाणीकरण, डिजिटल रिकॉर्ड, पोर्टेबिलिटी और आॅटोमेटेड मशीनें इस व्यवस्था की अहम कड़ी बन सकती हैं। यह मॉडल देश के दूसरे राज्यों में भी सार्वजनिक वितरण प्रणाली के आधुनिकीकरण का आधार बन सकता है।





