जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा आज इजरायल में आम चुनाव हो रहे हैं। मुख्य मुकाबला बेंजामिन नेतन्याहू और गादी आइजनकोट के बीच है। इस चुनाव पर दुनिया भर के देशों की निगाहें टिकी हैं। जानकारों का कहना है कि अगर जीत आइजनकोट की होती है तब इजरायल और ईरान युद्ध को लेकर कोई बड़ा परिवर्तन हो सकता है।
संसदीय चुनाव के लिए वोटिंग
इजराइल में भारतीय समय के अनुसार आज सुबह 9:30 बजे से संसदीय चुनाव के लिए वोटिंग शुरू हो चुकी है। गाजा पर इजरायल के हमले के बाद पहली बार है जब बेंजामिन नेतन्याहू को चुनावी परीक्षा देनी पड़ रही है। दुनियाभर के देशों और राजनीतिक जानकारों की नजरें इस चुनाव पर टिकी हैं। विश्लेषकों का मानना है कि इस बार बेंजामिन नेतन्याहू की राहें काफी मुश्किल हैं। वहीं उनके चुनाव जीतने के रिकॉर्ड को देखकर ऐसा भी अनुमान लगाया जा रहा है कि वे इस बार भी इस चुनावी अग्निपरीक्षा में बाजी मार ले जाएंगे। बता दें कि छह में से चार ओपिनियन पोल में आइजनकोट के गठबंधन को ज्यादा सीटें दी गई हैं। वहीं नेतन्याहू के गठबंधन को एक पोल में बढ़त और एक पोल में बहुमत मिला है। इजराइल की संसद में कुल 120 सीटें हैं। सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सीटों की जरूरत होती है। इजराइल के 76 साल के इतिहास में आज तक किसी भी राजनीतिक पार्टी ने अकेले बहुमत हासिल नहीं किया है।
इजराइल में चुनाव का तरीका
इजराइल में वोटिंग के तरीकों की बात करें तो यहां का चुनाव भारत से अलग होता है। यहां के लोग किसी नेता को नहीं, बल्कि उसकी पार्टी को वोट देते हैं। चुनाव से पहले हर पार्टी अपने उम्मीदवारों की एक सूची बनाती है। पूरे देश में पार्टी को मिले वोटों के आधार पर तय होता है कि उसे संसद में कितनी सीटें मिलेंगी। वहीं संसद में सीट पाने के लिए एक शर्त है। किसी पार्टी को कुल वैध वोटों में से कम से कम 3.25 प्रतिशत वोट हासिल करने होते हैं। इससे कम वोट मिलने पर पार्टी को संसद में कोई सीट नहीं मिलती। पार्टी के कौन से उम्मीदवार सांसद बनेंगे, इसका फैसला उम्मीदवारों की लिस्ट से होता है। हर पार्टी चुनाव से पहले अपने उम्मीदवारों की एक लिस्ट जारी करती है। अगर किसी पार्टी को 20 सीटें मिलती हैं, तो लिस्ट में पहले 20 नंबर पर मौजूद उम्मीदवार सांसद बन जाएंगे।
नेतन्याहू ने किया चुनाव प्रचार
बेंजामिन नेतन्याहू ने चुनाव प्रचार के दौरान जनता से एक बार फिर उन्हें चुनने की अपील की और कहा कि अगर काम खत्म करना है तो उनकी सरकार फिर बननी जरूरी है। नेतन्याहू ने कहा कि केवल वह ही अमेरिका को ईरान के खिलाफ ऐक्शन के लिए मजबूर कर सकते हैं। ऐसे में इस काम को अगर खत्म करना है तो एक बार फिर से उनका चुना जाना जरूरी है। दूसरी आरे संसदीय चुनाव से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को खुलकर समर्थन किया है। ट्रंप ने इजरायली मतदाताओं से नेतन्याहू को वोट देने की अपील करते हुए कहा कि उन्हें वह काम पूरा करना है, जो दोनों नेताओं ने मिलकर शुरू किया था। ट्रंप के इस बयान के बाद ईरान के खिलाफ दोबारा सैन्य कार्रवाई की संभावनाओं को लेकर चर्चा तेज हो गई है। बता दें कि अमेरिका और इजरायल ने इसी साल फरवरी में ईरान के खिलाफ संयुक्त रूप से युद्ध शुरू किया था। अब चुनाव से ठीक पहले ट्रंप ने नेतन्याहू का समर्थन दोहराया है. वहीं, नेतन्याहू ने भी संकेत दिए हैं कि अगर वह सत्ता में बने रहते हैं तो ईरान के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जा सकती है। इजरायल में नेतन्याहू के सामने गादी आइजनकोट हैं। वे इजरायल में सेना प्रमुख रह चुके हैं। ऐसे में खुद को ज्यादा जिम्मेदार और जानकार व्यक्ति के रूप में जनता के सामने रख रहे हैं। जानकारों का कहना है कि इजरायल में सत्ता परिवर्तन होने से अमेरिका-इजरायल सुरक्षा संबंधों में कोई बदलाव तो नहीं आएगा लेकिन ईरान के साथ युद्ध जारी रखने पर बड़ा निर्णय हो सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि आइजनकोट के समर्थकों का कहना है कि नेतन्याहू ईरान युद्ध को चुनावी फायदे के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं।





