जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली। अमेरिका-ईरान की जंग के बीच स्ट्रेट आफ होर्मुज में खतरा काफी बढ़ गया है। इस इलाके में जिस तरह का माहौल उससे नहीं लगता कि यह संकट जल्द खत्म होगा। ऐसे में अमेरिका और ईरान की तानाशाही से परेशान भारत और यूएई ने स्ट्रेट आफ होर्मुज की काट निकाल ली है। इससे देश में तेल और गैस की सप्लाई में तेजी आएगी।
ट्रंप ने किया बड़ा दावा
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के खिलाफ युद्ध जीतने के बाद तेल और गैस की कीमतों में बड़ी गिरावट का दावा किया है। दूसरी ओर ईरान ने अपनी ऊर्जा सुविधाओं और तेल टैंकरों पर हमले की स्थिति में अमेरिका को गंभीर जवाब देने की चेतावनी दी है। इस बीच इस युद्ध में तुर्की ने एंट्री मारी है। तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन ने इजरायल पर अमेरिका-ईरान शांति समझौता बिगाड़ने का आरोप लगाया है। वहीं नेतन्याहू ईरानी शासन के अंत को अपना प्रमुख लक्ष्य बताया है। बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ युद्ध में अमेरिका की जीत के बाद तेल की कीमतों में तेज गिरावट आएगी। उन्होंने कहा कि गैस की कीमत पहले तीन डॉलर प्रति गैलन तक आ सकती है और अंतत: दो डॉलर प्रति गैलन से भी नीचे जा सकती है। ट्रंप ने यह भी दोहराया कि अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा। दूसरी ओर ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने अमेरिका को ईरान की ऊर्जा सुविधाओं पर किसी भी कार्रवाई के खिलाफ चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि ईरान का तेल और गैस उत्पादन तंत्र काफी फैला हुआ है। उसकी सुरक्षा आसान नहीं है। गालिबाफ ने कहा कि हमारी संपत्तियों पर हमला करेंगे तो आप पर भी हमला होगा। इन बातों से साफ हो जाता है कि पश्चिम एशिया के इस इलाके में शांति जल्द नहीं आने वाली है। बता दें कि स्ट्रेट आॅफ होर्मुज दुनिया में कच्चे तेल का सबसे बड़ा हाइवे माना जाता है। इस समय यह इलाका पूरी तरह जंग का अखाड़ा बन चुका है। ये संकरा समुद्री रास्ता इतना खतरनाक हो गया है कि जिसका जब जी चाहता है, पास से गुजरते तेल टैंकरों पर मिसाइल दाग देता है। इस खुली दादागिरी की वजह से ग्लोबल आॅयल सप्लाई की कमर टूट चुकी है। इस संकट से निपटने के लिए भारत और यूएई ने नया प्लान तैयार किया है। नए प्लान के अनुसार यूएई अपने पूर्वी तट पर नए पोर्ट्स, पाइपलाइन्स और रेलवे नेटवर्क को तेजी से बढ़ा रहा है। इसका मकसद होर्मुज के संकरे रास्ते को बाईपास करना है। इस मास्टरप्लान से यूएई की अपनी अर्थव्यवस्था तो सुरक्षित होगी ही। इसके साथ ही भारत को भी बिना किसी रुकावट के कच्चा तेल मिलता रहेगा।
यूएई के राष्ट्रपति के सलाहकार का बयान
अबू धाबी में आयोजित प्रतिष्ठित हिली फोरम के दौरान यूएई के राष्ट्रपति के सलाहकार अनवर गरगाश ने दुनिया के सामने अपने देश का इरादा पूरी तरह साफ कर दिया। उन्होंने कहा कि संयुक्त अरब अमीरात अपनी अर्थव्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा निर्यात को इस जंग का बंधक बिल्कुल नहीं बनने देगा। गरगाश ने बताया कि यूएई अपने ईस्ट कोस्ट पर नए पोर्ट्स की क्षमता बढ़ा रहा है। साथ ही ओमान की खाड़ी से जुड़ने वाली नई तेल पाइपलाइनों और रेलवे कॉरिडोर पर दिन-रात काम चल रहा है। इस पाइपलाइन के शुरू होने से भारत को न केवल सस्ता तेल मिलेगा बल्कि सरकार के पैसे भी बचेंगे। बता दें कि नए प्लान के अनुसार यूएई अपने पूर्वी तट जैसे फुजैराह पोर्ट से सीधा ओमान की खाड़ी और अरब सागर में तेल टैंकरों को लोड कर सकेगा। भारतीय जहाजों को अब फारस की खाड़ी के अंदर जाकर होर्मुज के खतरनाक रास्ते में फंसने की जरूरत नहीं पड़ेगी। ईरान भले ही होर्मुज में पहाड़ जैसे रोड़े अटकाता रहे, लेकिन यूएई की नई पाइपलाइनों के जरिए भारत तक कच्चे तेल की सप्लाई बिना रुके जारी रहेगी। बता दें कि अमेरिका और ईरान की नई धमकियों और अमेरिका की सख्त नाकेबंदी के बीच यूएई का ये कदम एक बहुत बड़ी कूटनीतिक जीत माना जा रहा है। यूएई ने ये साबित कर दिया है कि वो किसी के युद्ध का मोहरा नहीं बनेगा।





