जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली। चीनी वैज्ञानिक ने अब तक का सबसे खतरनाक प्रयोग कर दुनिया में खलबली मचा दी है। चीन की सिंघुआ यूनिवर्सिटी के भौतिकविदों ने प्रयोगशाला में फॉल्स वैक्यूम डिके नामक खतरनाक ब्रह्मांडीय घटना को सफलतापूर्वक दोहराया है। यह एक ऐसी सैद्धांतिक स्थिति है जो अंतरिक्ष में प्रकाश की गति से फैलने वाला महा-बुलबुला बनाकर पूरे ब्रह्मांड को पल भर में नष्ट कर सकती है।
खतरनाक बुलबुले को दिया जन्म
चीन के वैज्ञानिकों ने महाप्रयोग किया है। इस बार यह प्रयोग कोरोना जैसे वायरस को जन्म नहीं देगा, बल्कि एक खतरनाक बुलबुले को जन्म देगा। चीन की प्रतिष्ठित शिंघुआ यूनिवर्सिटी की प्रयोगशाला के अंदर खौफनाक ब्रह्मांडीय घटना को रीक्रिएट किया गया है। यह सैद्धांतिक रूप से पूरी सृष्टि को पल भर में नष्ट कर सकती है। वैज्ञानिकों ने इस कयामत जैसी घटना फॉल्स वैक्यूम डिके के मुख्य तंत्र को लैब में लाइव देखा। इस बेहद संवेदनशील और अद्भुत शोध के परिणाम फिजिकल रिव्यू लेटर्स जर्नल में प्रकाशित हुए हैं। इस प्रयोग के बारे में बात करते हुए यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों का कहना है कि इस प्रयोग का मतलब यह कतई नहीं है कि हम ब्रह्मांड को नुकसान पहुंचाना चाहते हैं। इस प्रयोग के जरिए यह समझने की कोशिश हुई है कि ब्रह्मांड का निर्माण और विकास कैसे हुआ।
फॉल्स वैक्यूम डिके की थ्योरी का विकास
बता दें कि फॉल्स वैक्यूम डिके की थ्योरी का विकास 1970 के दशक में हुआ था। पहली बार जब इसका प्रयोग किया गया तो पाया गया कि हमारा ब्रह्मांड वर्तमान में एक अस्थायी या फॉल्स वैक्यूम यानी झूठे निर्वात की स्थिति में हो सकता है। यदि यह अचानक अपने से कम ऊर्जा वाले ट्रू वैक्यूम में बदल जाता है तो अंतरिक्ष में विनाश का एक ऐसा महा-बुलबुला बनेगा जो प्रकाश की गति से फैलेगा। इसका फैलाव बेहद खतरनाक तरीके से होता है। इसके रास्ते में आने वाला ग्रह, तारा या गैलेक्सी हर चीज का नामोनिशान मिट जाएगा।
अद्भुत शोध के परिणाम
संवेदनशील और अद्भुत शोध के परिणामों के अनुसार वैज्ञानिकों ने लेजर बीम की मदद से परमाणुओं के एक ऊर्जा स्तर को कृत्रिम रूप से बढ़ाकर फॉल्स वैक्यूम तैयार किया है। यह ट्रू वैक्यूम की तरह काम कर रहा था। शोध में पाया गया कि क्वांटम उतार-चढ़ाव के कारण फॉल्स वैक्यूम टूटकर ट्रू वैक्यूम में बदलने लगा। वैज्ञानिकों ने इस दौरान विनाशकारी वैक्यूम बुलबुलों के बनने और उनके फैलने की प्रक्रिया को सीधे अपनी आंखों से रिकॉर्ड किया। इस प्रयोग के लिए उपयोग किए गए रिडबर्ग एटम एरेज ने साबित कर दिया है कि भविष्य में बिना हर एक कण को नियंत्रित किए भी जटिल से जटिल क्वांटम सिस्टम को डिकोड किया जा सकता है। इससे गूगल जैसी दिग्गज कंपनियों के क्वांटम कंप्यूटरों को सुपरफास्ट बनाने में मदद मिलेगी। यह प्रयोग विज्ञान की दुनिया में एक मील का पत्थर भी साबित हो सकता है।
ब्रह्मांड में असल में फॉल्स वैक्यूम डिके
इस बारे में वैज्ञानिकों का मानना है कि ब्रह्मांड में असल में फॉल्स वैक्यूम डिके की घटना को सीधे देख पाना नामुमकिन है। ऐसे में पहली बार चीनी वैज्ञानिकों के प्रयोग से अंतरिक्ष में होने वाली इस घटना को लैब में देखा जा सका है। यह रिसर्च केवल विनाश की भविष्यवाणी नहीं है, बल्कि यह भविष्य के सुपर क्वांटम कंप्यूटरों के निर्माण का नया रास्ता भी बन सकती है।





