19 दिन तक मौत से जंग लड़ते आखिर हार गए भाजपा सांसद हुकुम सिंह

पश्चिमी यूपी के कद्दावर नेताओं में शुमार सांसद हुकुम सिंह का नोएडा के जेपी अस्पताल में निधन हो गया। उन्हें सांस में तकलीफ के बाद सेक्टर 128 स्थित जेपी अस्पताल के आइसीयू में भर्ती कराया गया था। वह पिछले 15 दिनों से लगातार आइसीयू में थे।


सात बार रह चुके हैं विधायक
वे उत्तर प्रदेश से सात बार विधायक रहे और 2014 के चुनावों में कैराना से लोकसभा सांसद चुने गए। प्रधानमंत्री मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, उत्तर प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र नाथ पांडेय, यूपी के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ समेत कई बड़े नेताओं ने उनके निधन पर दु:ख जताया।


हुकुम सिंह की हैं पांच बेटियां
पांच अप्रैल 1938 को कैराना में जन्मे हुकुम सिंह का ताल्लुक किसान परिवार से था। उन्हें पांच बेटियां हैं। एक बेटी मृगांका सिंह गाजियाबाद में स्कूल चलाती हैं। चार बेटियां अमेरिका में रहती हैं। सात साल पहले पत्नी रेवती देवी की घर में डकैती के दौरान हत्या कर दी गई थी।


1974 में की थी करियर की शुरूआत
हुकुम सिंह ने अपने राजनीतिक करियर की शुरूआत वर्ष 1974 में की थी। पहली बार वह कांग्रेस की टिकट पर विधान सभा का चुनाव लड़े थे। बाद में उन्होंने भाजपा की सदस्यता ले ली। 1974 से 2014 के दौरान वह सात बार विधायक रहे। दो बार कांग्रेस व भाजपा की सरकार में यूपी कैबिनेट मंत्री भी बने। 1983 से 85 के दौरान विधानसभा के डिप्टी स्पीकर भी रहे। वर्तमान में वह वाटर रिसोर्स एंड स्टैंडिंग कमेटी समेत कई अन्य समितियों के सदस्य थे। वर्ष 2013 में मुजफ्फरनगर दंगे में उनपर एफआईआर भी दर्ज हुई थी।


हिन्दू पलायन का मुद्दा उठकार भारतीय राजनीति में छाए
इस दिग्गज नेता ने आरोप लगाया था कि एक समुदाय के कारण करीब 346 हिंदू परिवार कैराना से पलायन करने के लिए मजबूर हुए। सिंह की ओर से यह मुद्दा उठाने के बाद बीजेपी ने इसे यूपी चुनाव 2017 के घोषणापत्र में भी शामिल किया था। चुनाव के दौरान बीजेपी ने इस मुद्दे को जमकर भुनाया।

 

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